पंचांग देखने वाले अक्सर पूछते हैं आज का करण कौन सा है, कब बदलेगा, और इसका मतलब क्या होता है।पंचांग देखने वाले अक्सर पूछते हैं आज करण कौन सा है, कब बदलेगा, और इसका मतलब क्या होता है। चलिए आसान भाषा में समझते हैं। दिल्ली के हिसाब से आज, यानी 7 सितंबर 2026 को, दिन की शुरुआत बव करण से हुई है। यह सुबह करीब 6:17 बजे तक रहेगा। इसके बाद बालव करण आएगा, जो शाम लगभग 5:05 बजे तक चलेगा, और फिर कौलव करण शुरू हो जाएगा। ध्यान रहे, अलग अलग शहरों में सूर्योदय के समय में फर्क होने की वजह से इन टाइमिंग्स में थोड़ा-बहुत अंतर आ सकता है इसलिए किसी खास पूजा पाठ के लिए अपने शहर का पंचांग जरूर देख लें आज का पंचांग।
आज करण बारबार क्यों बदल रहा है?
दरअसल करण की अवधि रोज एक जैसी नहीं रहती। यह सूरज और चाँद की आपसी स्थिति पर निर्भर करती है, इसलिए तारीख के साथ-साथ सही जगह और समय जानना भी जरूरी हो जाता है। आज भी यही हो रहा है सुबह बव करण, फिर बालव, और शाम ढलते-ढलते कौलव करण शुरू हो जाएगा। वैसे आज भाद्रपद कृष्ण पक्ष की एकादशी भी है, और इसी दिन अजा एकादशी का व्रत रखा जा रहा है। तो अगर आप व्रत या पूजा के लिहाज से समय देख रहे हैं, तो सिर्फ करण नहीं, तिथि, आज का योग नक्षत्र, योग और राहुकाल पर भी नजर रखनी चाहिए।
करण होता क्या है?
सीधी भाषा में कहें तो एक तिथि का आधा हिस्सा ही करण कहलाता है। तिथि सूरज-चाँद के बीच के कोणीय फासले से तय होती है, और उसी हिसाब से करण भी बनता है। चूंकि हर तिथि में दो करण समाए होते हैं, इसलिए दिन के बीच में करण बदल जाना कोई अनोखी बात नहीं है। पंचांग में कुल 11 करण गिने जाते हैं इनमें से 7 “चर” करण होते हैं, जो एक तय क्रम में बार-बार लौटते रहते हैं, और बाकी 4 “स्थिर” करण खास मौकों पर ही आते हैं।
7 चर करण इनका क्रम कुछ यूं है
बव, बालव, कौलव, तैतिल, गर, वणिज और विष्टि यही सात चर करण हैं। ये एक निश्चित रोटेशन में आते-जाते रहते हैं। बव करण को आमतौर पर अनुकूल माना जाता है, हालांकि सिर्फ इसे देखकर किसी शुभ काम का समय तय करना ठीक नहीं समझा जाता।बालव करण भी शुभ कार्यों के लिए सामान्यतः ठीक माना जाता है, पर फिर भी अकेले इसके भरोसे मुहूर्त नहीं निकालना चाहिए बाकी पंचांग अंग भी देखने पड़ते हैं।कौलव करण तीसरे नंबर पर आता है और बालव के खत्म होते ही शुरू हो जाता है।
विष्टि करण, जिसे लोग भद्रा के नाम से भी जानते हैं, इनमें थोड़ा अलग है। विवाह, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कामों में भद्रा काल को अक्सर टाला जाता है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि इस दौरान हर काम रुक जाना चाहिए अलग-अलग कामों के अपनेअपने नियम होते हैं।
4 स्थिर करण
शकुनि, चतुष्पद, नाग और किंस्तुघ्न ये चारों स्थिर करण हैं। चर करणों की तरह ये बार-बार नहीं दोहराते, बल्कि चंद्र मास की कुछ खास तिथियों में ही दिखाई देते हैं।याद रखने का सीधा तरीका: कुल 11 करण, जिनमें 7 चर और 4 स्थिर।
करण का महत्व क्या है?
पंचांग के पांच मुख्य अंगों में करण भी एक है बाकी चार हैं तिथि, वार, नक्षत्र और योग। इसलिए जब भी पंचांग देखा जाता है, ये सब मिलाकर ही दिन की पूरी तस्वीर बनती है।शुभ मुहूर्त निकालते वक्त करण को ध्यान में रखा जाता है, पर सिर्फ इसी पर टिककर फैसला नहीं लिया जाता। पूजा हो, विवाह हो या गृह प्रवेश तिथि, नक्षत्र, योग, राहुकाल सबको साथ देखना ही समझदारी है।
शहर बदलने पर टाइमिंग क्यों बदल जाती है?
दिल्ली, मुंबई, जयपुर या लखनऊ हर जगह करण का समय थोड़ा इधर-उधर हो सकता है, क्योंकि सूर्योदय का समय और पंचांग गणना हर शहर में अलग होती है। रोजमर्रा की जानकारी के लिए यह फर्क कोई मायने नहीं रखता, आज का चौघड़िया पर अगर कोई विशेष मुहूर्त निकालना हो तो अपने शहर का सही पंचांग देखना ही बेहतर रहेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
आज कौन सा करण है?
7 सितंबर 2026 को दिल्ली में सुबह बव करण चल रहा है, जो लगभग 6:17 बजे तक रहेगा। इसके बाद बालव करण शाम 5:05 बजे तक, फिर कौलव करण शुरू होगा।
करण कुल कितने होते हैं?
11 जिनमें 7 चर और 4 स्थिर करण शामिल हैं।
करण का मतलब क्या है?
एक तिथि का आधा भाग। एक तिथि में दो करण आते हैं, इसलिए दिन में करण बदल सकता है।
विष्टि करण को भद्रा क्यों कहते हैं?
परंपरा में विष्टि करण को ही भद्रा कहा जाता है, और मांगलिक कार्यों में इस दौरान सावधानी बरती जाती है।
क्या सिर्फ करण देखकर मुहूर्त निकाला जा सकता है?
नहीं, करण मुहूर्त का एक हिस्सा भर है तिथि, नक्षत्र, योग, राहुकाल वगैरह भी देखने जरूरी हैं।
आखिर में
7 सितंबर 2026 को दिल्ली में बव करण सुबह तक, फिर बालव करण शाम तक, और उसके बाद कौलव करण यही आज का क्रम है। जगह के हिसाब से समय में थोड़ा हेरफेर हो सकता है, इसलिए बेहतर होगा कि किसी जरूरी काम से पहले अपने शहर का पंचांग एक बार जरूर देख लें।