आज का राहु काल कितने बजे है? Aaj Ka Rahu Kaal Today

अगर आप आज कोई नया काम शुरू करने वाले हैं, तो आपके मन में सवाल आ सकता है कि आज का राहु काल कितने बजे है। हिंदू पंचांग में राहुकाल को दिन का ऐसा समय माना जाता है, जब नया शुभ या मांगलिक कार्य शुरू करने से बचने की परंपरा है। राहु काल रोज आता है, लेकिन उसका समय हर दिन और हर शहर में एक जैसा नहीं रहता। सही Rahu Kaal Today जानने के लिए आपका स्थान, सूर्योदय, सूर्यास्त और वार देखा जाता है।

आप दिल्ली में रहते हैं तो आपका राहुकाल मुंबई या कोलकाता से अलग हो सकता है। वजह बहुत सीधी है, क्योंकि दिल्ली, मुंबई और कोलकाता में सूर्य एक ही समय पर नहीं निकलता। दिन की अवधि बदलते ही राहुकाल की शुरुआत और समाप्ति भी बदल जाती है। इसलिए केवल सप्ताह की सामान्य राहुकाल तालिका देखकर किसी शहर का सटीक समय तय नहीं करना चाहिए।

आज का राहु काल कितने बजे से कितने बजे तक है?

आज 11 अगस्त 2026, मंगलवार है। नई दिल्ली में आज सूर्योदय लगभग सुबह 5:48 बजे और सूर्यास्त शाम 7:04 बजे है। AstroYogi के स्थान आधारित पंचांग के अनुसार दिल्ली में आज का राहु काल दोपहर 3:45:06 बजे से शाम 5:24:43 बजे तक है। अगर आप किसी दूसरे शहर में हैं, तो कुछ मिनट से लेकर करीब एक घंटे तक का अंतर भी देखने को मिल सकता है।

आज श्रावण कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी भी है और 11 अगस्त 2026 को सावन शिवरात्रि बताई गई है। पुनर्वसु नक्षत्र सुबह 10:09 बजे तक रहने के बाद पुष्य नक्षत्र शुरू होता है। इसलिएआज का पूरा पंचांग देखते समय केवल आज का राहु काल ही नहीं, बल्कि तिथि, नक्षत्र, योग और शुभ मुहूर्त का आपसी संबंध भी आपके काम आता है।आज का राहु काल

आज की पंचांग जानकारीनई दिल्ली
तारीख11 अगस्त 2026
वारमंगलवार
पक्षकृष्ण पक्ष
तिथिचतुर्दशी
सूर्योदयलगभग 5:48 AM
सूर्यास्तलगभग 7:04 PM
राहु काल3:45:06 PM – 5:24:43 PM
यमगंड9:06:36 AM – 10:46:14 AM
गुलिक काल12:25:51 PM – 2:05:28 PM
नक्षत्रपुनर्वसु, बाद में पुष्य

आज अलग-अलग शहरों में राहु काल का समय

शहरआज का राहु काल
दिल्ली3:45:06 PM – 5:24:43 PM
मुंबई3:56:03 PM – 5:32:25 PM
कोलकाता2:56:31 PM – 4:33:58 PM
बेंगलुरु3:33:48 PM – 5:08:17 PM
चेन्नई3:23:05 PM – 4:57:37 PM
उज्जैन3:47:56 PM – 5:25:37 PM

राहु काल क्या होता है?

राहु काल या Rahukaal हिंदू पंचांग और वैदिक ज्योतिष में दिन की एक विशेष अवधि का नाम है। परंपरागत ज्योतिष में राहु को छाया ग्रह माना जाता है और उसी के नाम पर इस समय को राहु काल कहा जाता है। उत्तर भारत में “राहुकाल” और दक्षिण भारत में “Rahu Kalam” शब्द अधिक सुनने को मिलते हैं। नाम अलग हो सकता है, लेकिन गणना का आधार दिन में सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच का समय रहता है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार राहुकाल में नया शुभ कार्य शुरू करने से बचा जाता है। इसका मतलब यह नहीं कि आपको डेढ़ घंटे तक अपने सभी काम बंद कर देने चाहिए। नौकरी, पढ़ाई, घर के सामान्य काम या पहले से शुरू गतिविधि जारी रखी जा सकती है। परंपरा मुख्य रूप से किसी नए महत्वपूर्ण कार्य की शुरुआत के समय राहुकाल देखने पर जोर देती है।

राहु काल कैसे निकाला जाता है?

राहु काल की गणना समझने के लिए आपको सबसे पहले अपने शहर का सूर्योदय और सूर्यास्त जानना होता है। दोनों के बीच मिलने वाले कुल दिनमान को आठ बराबर भागों में बांटा जाता है। हर वार के लिए उन आठ भागों में से एक निश्चित हिस्सा राहु को दिया गया है, इसलिए आज कौन सा दिन या वार है यह गणना का सीधा हिस्सा बन जाता है। मंगलवार के लिए सातवां भाग Rahu Kalam माना जाता है।

सप्ताह के किस दिन राहु काल कब आता है?

दिनराहु काल का भाग6 AM से 6 PM दिनमान का सामान्य उदाहरण
सोमवारदूसरा भाग7:30 AM – 9:00 AM
मंगलवारसातवां भाग3:00 PM – 4:30 PM
बुधवारपांचवां भाग12:00 PM – 1:30 PM
गुरुवारछठा भाग1:30 PM – 3:00 PM
शुक्रवारचौथा भाग10:30 AM – 12:00 PM
शनिवारतीसरा भाग9:00 AM – 10:30 AM
रविवारआठवां भाग4:30 PM – 6:00 PM

राहु काल में क्या नहीं करना चाहिए?

अगर आप परंपरागत पंचांग का पालन करते हैं, तो राहुकाल में किसी नए मांगलिक या महत्वपूर्ण काम की शुरुआत टाल सकते हैं। विवाह से जुड़ी नई रस्म, गृह प्रवेश, नई दुकान का उद्घाटन या नए व्यवसाय की शुरुआत जैसे काम आमतौर पर शुभ समय देखकर किए जाते हैं। घर, कार, सोना या दूसरी बड़ी खरीद शुरू करने से पहले भी कई परिवार राहुकाल देखते हैं। Drik Panchang भी नए शुभ कार्यों के संदर्भ में राहुकाल से बचने की परंपरा का उल्लेख करता है।

मान लीजिए आप शाम 4 बजे नई दुकान का उद्घाटन करना चाहते हैं और आपके शहर में राहु काल 3:45 से 5:25 तक है। परंपरा मानते हैं तो उद्घाटन को राहुकाल से पहले या बाद में रख सकते हैं। वहीं दुकान सुबह खुल चुकी है और रोज का कारोबार चल रहा है, तो राहुकाल आते ही उसे बंद करना जरूरी नहीं माना जाता। अंतर “नया काम शुरू करने” और “पहले से चल रहे काम” के बीच है।

क्या राहु काल में पूजा कर सकते हैं?

राहुकाल और पूजा को लेकर अलग परंपराओं में अलग मान्यताएं मिलती हैं। कुछ पंचांग शुभ ग्रहों से जुड़े नए अनुष्ठान शुरू करने से बचने की सलाह देते हैं, जबकि राहु से संबंधित पूजा, हवन या मंत्र जाप को इस अवधि में किया जा सकता है। इसलिए केवल “राहु काल में पूजा नहीं करनी चाहिए” जैसा एक नियम हर धार्मिक परंपरा पर लागू करना सही नहीं होगा। आपके घर या संप्रदाय में जो रीति मानी जाती है, उसे प्राथमिकता देना बेहतर रहता है।

अगर आपकी दैनिक पूजा रोज सुबह तय समय पर होती है, तो राहुकाल आने पर उसे लेकर घबराने की जरूरत नहीं है। राहुकाल मुख्य रूप से शुभ कार्य की नई शुरुआत से जुड़ी ज्योतिषीय अवधारणा है। किसी व्रत में चंद्रोदय का नियम जुड़ा हो, तो चाँद निकलने का स्थानीय समय राहुकाल से अलग लेकिन उसी दिन के पंचांग संदर्भ में जरूरी हो सकता है। किसी विशेष यज्ञ, गृह प्रवेश या संस्कार के लिए केवल Rahu Kaal को अकेला निर्णय मानने के बजाय पूरा मुहूर्त देखना ज्यादा व्यवस्थित तरीका है।

राहु काल और पंचांग का क्या संबंध है?

आप जब आज का पंचांग देखते हैं, तो केवल राहुकाल नहीं देखते। हिंदू पंचांग में वार, तिथि, नक्षत्र, योग और करण जैसे मुख्य अंग होते हैं। दैनिक पंचांग में इनके साथ सूर्योदय, सूर्यास्त, राहुकाल, यमगंड, गुलिक काल, चौघड़िया और अभिजीत मुहूर्त जैसी समय संबंधी जानकारी भी दी जाती है। इसी कारण Rahu Kaal को पंचांग के बड़े समय-तंत्र के एक हिस्से के रूप में समझना ज्यादा सही है।

मान लीजिए आप आज किसी पूजा का समय देख रहे हैं। पहले आज की तिथि देखते हैं, फिर नक्षत्र और वार समझते हैं, उसके बाद शुभ और अशुभ समय की तुलना करते हैं। ऐसी प्रक्रिया में राहुकाल एक फिल्टर की तरह काम कर सकता है, लेकिन पूरा मुहूर्त केवल उसी से तय नहीं होता। विवाह, गृह प्रवेश जैसे संस्कारों में और भी कई ज्योतिषीय तत्व देखे जाते हैं।।

आज का राहु काल कैसे देखें?

अगर आप रोज Aaj Ka Rahu Kaal देखते हैं, तो सबसे पहले तारीख और शहर जांचें। उसके बाद सूर्योदय और सूर्यास्त से Rahu Kaal timing का मिलान करें। साथ में दिन का वार देखना जरूरी है, क्योंकि सोमवार, मंगलवार और बाकी दिनों में राहु का निर्धारित हिस्सा अलग होता है। शहर आधारित Panchang आपको सामान्य weekday table से अधिक सटीक समय देता है।

आप तिथि, नक्षत्र और शुभ मुहूर्त को साथ रखें तो दिन की तस्वीर ज्यादा साफ मिलती है। किसी व्रत या पर्व वाले दिन आज का त्योहार भी उसी तारीख के धार्मिक संदर्भ को जोड़ता है। राहुकाल दैनिक पंचांग की कई समय अवधियों में से एक है, इसलिए पूजा या मांगलिक काम में इन संकेतों को साथ समझना ज्यादा उपयोगी रहता है।

आज का राहु काल से जुड़े सवाल

क्या राहुकाल हर दिन बदलता है?

हां, Rahukaal का वास्तविक समय तारीख और स्थान के साथ बदलता है। वार बदलने पर आठ हिस्सों में राहु का क्रम बदलता है, जबकि मौसम के साथ दिन की लंबाई भी बदलती रहती है। अगर कोई शुभ काम अगले दिन के लिए टल रहा है, तो कल का पंचांग देखकर नए वार, तिथि और स्थानीय सूर्योदय के अनुसार समय दोबारा मिलाना बेहतर रहता है। इसी कारण Monday Rahu Kaal, Tuesday Rahu Kaal और Sunday Rahu Kaal अलग हिस्सों में आते हैं।

राहु काल और शुभ मुहूर्त में क्या अंतर है?

राहुकाल को परंपरागत रूप से नया शुभ काम शुरू करने से बचने वाली अवधि माना जाता है। शुभ मुहूर्त किसी विशेष कार्य के अनुकूल समय को कहा जाता है और उसकी गणना में अलग ज्योतिषीय घटक शामिल हो सकते हैं। केवल Rahu Kaal खत्म होना अपने आप अगले समय को शुभ मुहूर्त नहीं बनाता। विवाह, गृह प्रवेश या दूसरे बड़े संस्कार के लिए पूरा Muhurat देखना अधिक उपयुक्त रहता है।

निष्कर्ष

अगर आप आज का राहु काल जानना चाहते हैं, तो केवल सप्ताह का दिन देखकर फैसला न करें। सही Aaj Ka Rahu Kaal Today आपके शहर के सूर्योदय, सूर्यास्त और वार के आधार पर निकलता है। 11 अगस्त 2026, मंगलवार को दिल्ली में राहु काल लगभग 3:45 PM से 5:24 PM है, जबकि दूसरे शहरों में समय अलग है। इसलिए किसी महत्वपूर्ण नई शुरुआत से पहले location-based timing देखना ज्यादा सटीक रहेगा।

आप पंचांग की परंपरा मानते हैं तो Rahu Kaal के साथ आज की तिथि, आज का पंचांग, नक्षत्र, चौघड़िया, यमगंड, गुलिक काल और शुभ मुहूर्त भी देख सकते हैं। इन सभी विषयों का आपस में संबंध है, लेकिन हर एक का अर्थ और उपयोग अलग है। जानकारी को डर की तरह नहीं बल्कि अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा के संदर्भ में समझें। बड़े व्यावहारिक निर्णय लेते समय वास्तविक परिस्थितियों को भी बराबर महत्व दें।

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